चली मीता गावं चली

Logo ६ श्रावण २०७८, बुधबार १८:३२ | Aadil Times                  

………….. चली मीता गावं चली…………….
– अब्दुल रहमान (खान सर)
भैरहवा, रुपन्देही

चली मीता गावें चली, कुछ दिन ओहरे बितावल जाई
असों कय साल ते अइसे हो, आनी साल आवल जाई
अब आनी साल आवल जाई

चौधरी चाचा के चबुतरा पर चना चूरा चबावल जाई
पटवारी कय पोखरा से पकरि के पढिना लावल जाई
कल्लु काका के कोइडारे से काकर खीरा लावल जाई
ब्रह्मा बाबा के बगिया मे, बैठ के बांसुरी बजावल जाई
चली मीता गावें चली ………………

लौट चला गांव के ओर खेती खरिहानी करावल जाई
कुंवारेम धान कटा के, खरिहान में पयर गिरावल जाई
पैरा परकोसा झारि के, पंखी से धान ओसावल जाई
मोटा कय भुजिया कइ के, महीन धान कुटावल जाई
चली मीता गावें चली ……………….

आलु, केराव, लाही, मसुरी कातिक में बोवावल जाई
संझा भिनही कुदरा लेके कोन किनारा बनावल जाई
लगा के पट्टा इन्जन मे अगहन मे खेत भिजावल जाई
रुख सुख जवने मिली सन्तोख मार के खावल जाई
चली मीता गावें चली ……………….

लकडाउन कय चलते, चलल फिरल इहां दुशवार बा
इहां होइ नाइ मयस्सर कबो जइसन वहं शुद्ध बयार बा
सखा सहेला मिल कय सीवानें सीवानें छुछुवावल जाई
खाइ के दुध, दही, छाछ, घिउ देंह मजबूत बनावल जाई
चली मीता गावें चली ………………

टीवी, मोबाइल, फेसबुक से जियरा उजबिजाइल बा
घर भाडा के कचकच से मन हमार कच्चाइल बा
बिजुली कय झालर से कब तक तिउहार मनावल जाई
असों के साल अमवशा मे तेल कय दीया जलावल जाई
चली मीता गावें चली ………………….

कमाई धमाई अ रोजी रोजगार चौपट धन्धा व्यापार बा
स्कुल-कालेज, पढाई-लिखाई बन्द सज्जो कारोबार बा
पियाज, टमाटर, हरियर तरकारी सज्जो सौ के पार बा
मंहगाई कय मारल बा, आन्हर बहिरन कय सरकार बा
चली मीता गावें चली……………..



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