” नारी अउर महतारी “सियाराम माैर्या

Logo १५ भाद्र २०७८, मंगलवार ००:०८ | Aadil Times                  

शिर्षक :- ” नारी अउर महतारी ”

बरदास के चट्टान बानिन् , बानिन् ममता के खानी।
कउनाे माेल न् माईन के अनमाेल बानिन् महतारी।।

माेह् – मायाक् खान हईन , दु:ख – दर्द के खानी ।
रूप रंग अनेक बिटिया बहिन,माैगी भाैजी महतारी ।।

नारी से नर हाेलय् ,अउर हाेलय कृष्णा मुरारी ।
नरक नियन जहान के,खुशहाल स्वर्ग बनावे नारी ।।

सुबह-शाम,दिन-रात नय , नय देखय् जुनघारी ।
घर से बहरी सब के देखय् , मउका पे खेतबारी ।।

घर परिवार सवारें मे महतारी के हात भारी ।
रेख-देख सबकय् करय् बन के पालन हारी ।।

लईका-लईकी फरक नय बुझय् ई हईन महतारी।
भुख- पियास खाे जाला जब देखेलिन बचकानी।।

आइल-गइल केतना काठिनाई पर तनकाे ना घभरानी।
दु:ख के गठरी सर पे लेके मनावेलीन खुशीयाली ।।

क्षमा दान के भण्डार हईन,न्यारी प्यारी नारी।
हर गल्ती के माफ करय् हर लईक्क महतारी।।

लक्ष्मी के रूप काली स्वरूप जगत जननी नारी।
धर देवी रूप सवाँरी जब संकट आई भारी ।।

ब्रह्मा विष्णु माहेश पुजे अउर पुजे बाकें बिहारी।
मनाे कामना पुरण् हाेय जब कृपा करे महतारी ।।

लेखक:- सियाराम माैर्या( विद्यार्थी बाबू)
सम्मरी माई ग.पा. वार्ड न: ५ (पाण्डेथुम्हवाँ)
५ नम्बर लुम्बिनी प्रदेशकाे रूपन्देही जिल्ला नेपाल

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