‘बालक’ – राकेश कुमार यादव

Logo २६ पुष २०७८, सोमबार ०९:०४ | Aadil Times                  

कबिता शिर्षक- ‘बालक’
लेखक- राकेश कुमार यादव
पेशा- अध्यापन
रोहिणी-७, रूपन्देही
‌ (१)
उल्फतसे भरा बचपन, लोरवा बहाके ताकै |
उफ ! देशकै सितारा, गर्दिश में राह झांकै ||
(२)
नटखट शहरकै शुरमा, सुंदर नियन सितारा |
धुंधला गइल अंजोरिया, बनिकै उगल सहारा ||
बेफिक्र मनकै मौजी ,खेलय कदम बहाकै ||
उफ! देशकै ….. …………. ……
(३)
धर्तीपे चमन खिलकै, बिलखत घड़ी-घड़ी बा |
धूरियामें सनल जीवन, लम्हा कै कुछ कड़ी बा ||
मइयाके दिल दुलारा, बोलतबा तुलबुलाके ||
उफ ! देशकै ………… …….
(४)
बंधले बा हाथ शासन, उमडत बा भरल सीना |
बालश्रमसे बस बा बेबस, बेमूल्य बा पसीना ||
सुन बाल दिलकै आहट, सुनलापे जान फाटै ||
उफ ! देशकै ………… …….
‘ समाप्त’

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