कइसे मोंछ घुमाईं पगली”

Logo ५ आश्विन २०७८, मंगलवार १७:३० | Aadil Times                  

कबिता शिर्षक –

” कइसे मोंछ घुमाईं पगली”

लकडाउनमे बोझिल नयना,
जीवनयस मेहरारू बा ।
कइसे मोछ घुमाइ पगली,
दुनो हाथमे दारु बा ।।
टी•भी• पर न्यूज कोरोना बा,
मानव मानवता घूराता ।
हर चोक शहरकय वर्दीमे,
डंडासे काया तूराता ।।
जीव जीवनसे संघर्ष करय,
तकदीरिय बनल जुझारु बा ।।
कइसे मोंछ घुमाइ पगली•••••••••••••••••••●■
केहु ताली ठोंकय खिड़कीपे,
केहु दियना हरे जलावाता ।
केहु मानवता भगवान बदे,
केस थरिया घरे बजावाता ।।
सोचलीं डफला बजवाईं हम,
बार्डरपे बतिया भारु बा ।।
कइसे मोंछ घुमाइ पगली ••••••••••••••••••••••••●■
अब शूटबूट बा हैंगरपे,
बस जीवन कटतबा लुंगीमे ।
बारात बदे धोती धोके,
बाबा डरलेहंय थुन्हीमे ।।
देखत हीं लाइभ ब्याह बनी,
सब न्यौतापे जवन उतारु बा ।।
कइसे मोंछ घुमाइ पगली••••••••••••••••••••••••●■

 

✍️ राकेश कुमार यादव

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