‘ गुरु जी ‘ अवधि कविता

Logo २ आश्विन २०७८, शनिबार २१:५२ | Aadil Times                  

शिर्षक- ‘ गुरु जी ‘
रोवत कलम जंहवा‌, पकडय कलाई |
बहुत बार सोचेन कि, कइसे सिखाई ||
रहल नाव कागज, बनल फूल दस्ता |
बा अटपट खिलौना, चलत जवन‌ राही ||
अंधेरा‌ हटावेक, ‌कशिश दिलमें एतना |
तु रोवत रहेव‌ केस, हम हंस-हंस सिखाई ||
बसल एक तमन्ना, खुशी में ही तुहरे |
नियन‌ सूर्य जगमें, रहय तोर‌ रजाई ||
लगन एक दियना‌, जलावे के दिलमें |
बा साहब धरापर, ‌इहय बस कमाई ||

लेखक ;राकेश कुमार यादव – शिक्षक

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