बढिया कहर

Logo १७ भाद्र २०७८, बिहीबार ०८:४८ | Aadil Times                  

३- कबिता शिर्षक- ‘बढिया कहर’
२०७८-०३-७
बढिया में बडका कहर दैया आवा |
नदीतट बसल गाँव हमरो डुबावा ||
(१)
मचा हल्ला खल्ला, कहर करकराता |
उफानन में नदियाँ, लहर लपलपाता ||
तलातल शिवनवा में, छलकत है पानी |
बिना कुछ सहारा, जी पौंडय जवानी ||
विधाता ! भरल गाँव सडकनपे आवा |
बढिया में…… ……. ……
(२)
न दौलत खडा है, न कनई देखाता |
महल जलके भीतर,न मनई देखाता ||
सुखल ओठ पानीसे पनियके उपर |
भरल लोड कस्ती में बाजत है हूटर ||
बिपत में जरत जान फूटत है लावा ||
बढिया में………… ………
(२)
जलाजल भयंकर, बा बेबस लाचारी |
कोलाहल करिहै जे, प्रीतियाके हारी ||
प्रलय में गुमाईं, उफ् लहकत ललनवा |
हंसत चक्रवाती में, बिछुडल सजनवा ||
न बिलगाता रस्ता, न लौकत है खावा ||
बढिया में……

धन्यवाद🙏💕
लेखक – राकेश कुमार यादव
पेशा – प्राध्यापन
रोहिणी -७, रूपन्देही

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